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पंजाब में पानी की बढ़ती समस्या को लेकर 'जलपुरुष' डॉ. राजेंद्र सिंह से खास बातचीत


पंजाब में पानी की बढ़ती समस्या को लेकर 'जलपुरुष' डॉ. राजेंद्र सिंह से खास बातचीत
Published in http://www.dainiksaveratimes.com/news/special-interview-of-waterman-rajendra-singh-hindi-news-151302
6.1.2018


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साक्षात्कार डॉ. राजेंद्र सिंह
पांच नदियों के राज्य पंजाब में जल की समस्या बेहद गंभीर होती जा रही है। जहाँ भूमिगत जल स्तर कम होते जा रहा है वहीँ नदियों का पानी प्रदूषित हो चला है। ऐसे में जलपुरुष नाम से विख्यात मैग्सेसे एवं स्टॉकहोल्म वाटर पुरुस्कार से सम्मानित डॉ. राजेंद्र सिंह बेहद चिंतित दिखते हैं। क्या पंजाब पानी की इस बढती समस्या से उबर पायेगा? इसके लिए क्या कदम उठाने होंगे? इस विषय पर वरिष्ठ पत्रकार दीपक पर्वतियार ने विस्तार से उनसे बातचीत की।   
सवाल 1. पंजाब पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। यहाँ भूमिगत जलस्तर काफी तेजी से घट रहा है और यह काफी चिंता का विषय है। इस समस्या को आप किस दृष्टि से देखते हैं?
जवाबः  पंजाब इस समय कैंसर का केंद्र बना हुआ है। भूजल में बहुत सारी प्रदूषित बीमारियों का घर है और भूजल खाली हो रहा है। पहले नदियों से सिंचाई थी तो केमिकल फर्टिलाइजर नदियों की सिंचाई के साथ धरती के पेट में गए अब सिंचाई थोड़ी कम हो गई तो अब  धरती से ही पानी निकाला जा रहा है।
जो धरती के अंदर का पानी है वह बहुत प्रदूषित है। पंजाब की बीमारियां कैंसर की हो या और दूसरी बीमारियां हो उन सब का मूल आधार पानी का प्रदूषण है और अभी कोई आसार दिखता नहीं कि पंजाब को हम प्रदूषण मुक्त बना सके क्योंकि जिस तरह कि वहां खेती है जिस तरह का उद्योग है वह सब प्रदूषण को बढ़ावा देने वाला है। इसलिए पंजाब की बीमारियां बढ़ती जा रही है। पंजाब में उत्पादन घट रहा है जलवायु परिवर्तन के कारण।
एक जमाना था जब हरा-भरा पंजाब प्रदेश समृद्धि का प्रतीक दिखता था। हमें जल्दी से संभलना होगा। राज्य में नदियाँ हैं, काफी कैनाल इरीगेशन है। ऐसा होते हुए भी यदि कोई राज्य भूजल के भंडार पर निर्भर है तो यह बहुत खतरनाक घटना है। इसलिए अब  पंजाब को अपना फसल चक्र, वर्षा चक्र और उपलब्ध जल की उपयोग दक्षता बढ़ाने का काम करना पड़ेगा। यदि आप अपने उपलब्ध जल की उपयोगिता बढ़ाएंगे, कम पानी में ज्यादा उत्पादन कर सकेंगे, तभी स्थिति में सुधार हो सकता है।
मैं पिछले दिनों पंजाब हरियाणा के जिलों में घूमकर आया और वहां के किसानों ने मुझे बुलाया था। मैंने उनको कहा कि यह जो पानी का संकट दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है, इसका समाधान है।  हम लोग मिल जुलकर अपने फसल चक्र को वर्षा के साथ जोड़ें और अभी जो हम बाजारु खेती कर रहे हैं उस बाजारू खेती को नियंत्रित कर के हम कैसी खेती बढ़ाएं। खेती में जहाँ पानी के खर्चे कम हो और उत्पादन हो, उसको कहते शुष्क। जहां आप पानीदार खेती कर सकते हैं, खूब पानी है, वह कर लो। लेकिन पंजाब के एक बहुत बड़ा इलाके में अब नई तरह की खेती पर जाना होगा और यदि नई खेती पर नहीं गए तो मुश्किल होगी। मैं जानता हूं कि पंजाब भगवान का लाडला बेटा है और जब बिगड़ते हैं तो उनको ठीक करना मुश्किल काम होता है। पंजाब को कहें तो भारत का सबसे पर्याप्त पानी वाला प्रदेश था और आज कहे तो सबसे ज्यादा बीमार और लाचार बेकार होता जा रहा है प्रदेश है। उसको समय रहते ठीक करने की जरूरत है।

सवाल 2. भारत सरकार की जल नीति के बावजूद पंजाब ने जल प्राधिकरण बनाने में विलम्ब किया है...
जवाबः  भारत की जल नीति के प्रकाश में सभी राज्यों को जल प्राधिकरण बनाना था। किसी ने बनाया, किसी ने नहीं बनाया। इस समय भारत में सभी राज्यों में वहां राज्य कर रही राजनीतिक पार्टियों की मनमानी है और भारत सरकार अपने राज्यों को विश्वास में लेकर अच्छी नीतियों की पालना करवाने के लिए में अक्षम दिखती है। इसलिए यह कहना बड़ा मुश्किल है। जो पार्टी केंद्र में शासन कर रही है, उसके द्वारा शासित राज्यों में भी सरकारों में वह कमिटमेंट दिखता नहीं है कि भारत सरकार के निर्णय को वह साकार करें। इसलिए यह कहना मेरे लिए दूभर है कि किस राज्य ने जल्दी भारत की जलनीति के प्रकाश में राज्य जिला जल प्राधिकरण बनाया कि नहीं बनाया और क्यों नहीं बनाया।  लेकिन मैं इतना ही कहूंगा कि  पानी के मामले में हमारी तीन सरकारें हैं  -- पहली, भारत सरकार,  दूसरी, राज्य सरकार,  तीसरी पंचायत और आम लोग। तो यह जो तीनों सरकारें हैं इन तीनों सरकारों को पानी का समाधान करने के लिए अपनी अपनी जिम्मेदारी का एहसास करना पड़ेगा। अभी सब अपनी जिम्मेदारी से बच कर दूसरे पर जिम्मेदारी डालते देते हैं। जब हम अपनी जिम्मेदारी से बच कर दूसरों पर डालते हैं तब इस तरह की कशिश इस तरह का संकट हमेशा आता है।
सवाल 3. सर्वोच्च न्यायलय ने अपने आदेश में सतलज यमुना लिंक कैनाल को शुरू कर हरियाणा को पानी देने को कहा था, परन्तु इस आदेश से पंजाब के मालवा इलाके में करीब आधा दर्जन जिलों के नौ लाख एकड़ कृषि भूमि नदियों के पानी से वंचित हो जायेंगे। हरियाणा लिंक कैनाल के लिए जोर दे रहा है। वहां की विपक्षी पार्टी, इंडियन नेशनल लोक दल ने तो हरियाणा सरकार पर लिंक कैनाल के निर्माण को पुन: शुरू करने के लिए दबाव बनाने के लिए 7 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली का आयोजन किया है।
जवाबः  नदियों पर विवाद भारत में बढ़ता ही जा रहा है और सरकारें भारत की नदियों के विवाद के समाधान में भारत की जनता का विश्वास कायम नहीं कर पाई। दूसरे निर्णयों में सरकार की बातों को समाज मान लेता है। लेकिन नदियों पर राजनीति होती है और दलगत राजनीति के कारण कोई भी उच्चतम न्यायालय का नदियों का फैसला आज तक कायम नहीं हुआ है। चाहे कावेरी का फैसला हो, या जो भी फैसला हो, अच्छे से अच्छे फैसले भी दलगत राजनीति के शिकार हो जाते हैं। तो यह एक तरह की दलगत राजनीति है।  राजनीति में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समाधान नहीं ढूंढ लेंगे तब तक यह नदियों के विवाद दिन-ब-दिन बढ़ते जाएंगे। नदियों के विवाद के समाधान में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर और बाउंड्री से उठना पड़ेगा। हम क्या करते हैं कि राजनीतिक और प्रशासनिक सेवा में होने के कारण हम यह काम पूरा नहीं कर पाते। 
पंजाब में हम सो रहे हैं। केवल कुछ घोषणाओं से समाधान संभव नहीं है। यदि हम यह समाधान ढूंढना चाहते हैं तो लोगों के बीच संवाद शुरू करें, लोगों से समाधान ढूंढने की कोशिश करें, और लोग इसका समाधान क्या सोचते दिखाते हैं। सरकार सम्मानजनक रास्ता ढूंढेगी तो वह एक तरह का सस्टेनेबल सलूशन होगा। अभी सरकारें केवल अपने राजनीतिक लाभ को देखकर कुछ घोषणाए करती हैं। केवल लाभकारी घोषणाओं से समाज चलता नहीं है। 

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